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दुकान पर पिता का हाथ बटाने छोड़ी पढ़ाई, अब छोटे भाईयों को पढ़ा रहीं


कराहल-बरगवां। छह सदस्यों के परिवार को पालने के लिए दिनभर दुकान पर पसीना बहाते पिता को देख दो बहनों ने अपना बस्ता घर रख दिया। एक-एक कर दोनों बहनों ने स्कूल छोड़ा और पिता के साथ दुकान पर पंक्चर जोड़ने व साइकिल की मरम्मत करने जुट गईं। यह बहनें खुद तो नहीं पढ़ पाईं लेकिन, दो छोटे भाईयों को रोज स्कूल भेजती हैं। आदिवासी विकास खंड कराहल के बरगवां गांव की इन दो बहनों का पिता व परिवार के लिए समर्पण देख हर कोई भावुक हो जाता है।

यह कहानी है बरगवां के रामदयाल जाटव की 18 साल की बेटी नीतू जाटव और 16 वर्षीय रीना की। दोनों बहनों ने 8वीं की परीक्षा पास करने के बाद स्कूल छोड़ दिया। माता-पिता और चार बच्चों के परिवार में कमाने वाले अकेले रामदयाल थे जो गांव में ही साइकिल की दुकान चलाते थे। गृहस्थी के खर्च व बच्चों की पढ़ाई के लिए दिनभर दुकान पर पसीना बहाने के बाद भी रामदयाल आर्थिक तंगी में रहते थे।

यह देख बड़ी बेटी नीतू ने सात साल पहले स्कूल छोड़ दिया। नीतू ने आठवीं की परीक्षा पास करने के बाद हाईस्कूल में प्रवेश नहीं लिया बल्कि, पिता के साथ साइकिल की दुकान पर बैठने लगी। पहले तो वह पिता को साइकिल मरम्मत के लिए हाथों में औजार, दुकान की साफ-सफाई जैसे काम करती थी, लेकिन धीरे-धीरे वह साइकिल की मरम्मत से लेकर पंक्चर जोड़ने का काम करने लगी। नीतू के बाद उसकी छोटी बहन रीना ने भी आठवीं की पढ़ाई के बाद स्कूल छोड़ दिया और वह भी पिता व बड़ी बहन के साथ दुकान पर काम करने लगी।

परिवार की जरूरत देख खेलने का भी मन नहीं हुआ

नीतू और रीना के अनुसार उसके पिता के पास जमीन नहीं। इसलिए घर के लिए अनाज भी खरीदना पड़ता है। नीतू के अनुसार उनका परिवार बेहद गरीब है। दुकान से ही पूरे परिवार का भरण पोषण होता है। रीना ने बताया कि हमारी उम्र की लड़कियां गांवों में खेलती-कूदती रहती है, लेकिन परिवार की परेशानी देख हमारा मन कभी खेलने कूदने का भी नहीं हुआ। हां सामान्य बच्चों की तरह घर में चारों भाई बहन सुबह-शाम खेलते हैं और आपस में लड़ते-झगड़ते भी रहते हैं। इस पर कई बार मां भगवती बाई की डांट भी खानी पड़ती है।

भाइयों को नहीं छोड़ने देंगी स्कूल

नीतू और रीना ने पिता की मदद के लिए अपना स्कूल छोड़ा है। रीना के अनुसार यदि सरकार की ओर से ऐसी कोई मदद मिल जाती जिससे पिता को आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ता तो वह आगे भी पढ़तीं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। रीना व नीतू का कहना है कि, उन्होंने मजबूरी में अपनी पढ़ाई छोड़ी है, लेकिन दो छोटे भाई संतोष और नीरज को पढ़ाई नहीं छोड़ने देंगी। दोनों बहनों का कहना है कि उनके भाई पढ़कर सरकारी नौकरी करें। रीना व रेंनू का एक भाई संतोष छठवीं में पढ़ता है तो सबसे छोटा भाई नीरज अभी दूसरी कक्षा में है।


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