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नेहरू की जगह अटल, राजीव के बजाय पटेल


MINISTRY OF RURAL & URBAN

नई दिल्ली, (एजेंसी) 31 अक्टूबर । सत्ता में बदलाव के साथ ही अब सरकारी स्कीमों का भी नए सिरे से नामकरण की तैयारी हो रही है। सरकार अब राजीव आवास योजना समेत सभी पुरानी योजनाओं को एक ही मिशन के तहत लाकर उसे सरदार पटेल नैशनल मिशन फॉर अर्बन हाउसिंग का नाम देने जा रही है। सरकार इस पर भी विचार कर रही है कि शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए बनने वाली स्कीम का नाम भी अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर किया जाए। पिछली सरकार की इस तरह की स्कीम जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीकरण मिशन के नाम पर थी।

आवास और शहरी विकास मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मोदी के स्पेशल प्रोजेक्ट ‘2022 तक सभी को मकान‘ के लिए बनाई जा रही योजना सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम से तैयार की जा रही है। इसके लिए बाकायदा एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमिटी (ईएफसी) नोट तैयार है। सरकार का इरादा 2022 तक कुल 3 करोड़ मकान बनाने का है। सूत्रों का कहना है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में राजीव आवास योजना समेत कई हाउसिंग स्कीम चल रही थीं। इनमें से कुछ मकान तो जेएनएनयूआरएम के तहत बनाए जा रहे थे जबकि कुछ स्कीम स्लम में रहने वालों के लिए थीं।

लेकिन अब इन सभी स्कीमों को एक ही बड़े प्रोजेक्ट के तहत लाया जा रहा है। इसके लिए आवास मंत्रालय योजना तैयार कर रहा है। इस योजना का नाम सरदार पटेल नैशनल मिशन फार अर्बन हाउसिंग दिया गया है। माना जा रहा है कि सरकार एक तीर से दो राजनीतिक निशाने साध रही है। ऐसी योजनाओं से गांधी-नेहरू परिवार का नाम हट जाएगा और सरदार पटेल का नाम आ सकेगा। वहीं कांग्रेस गलत संदेश से बचने लिए इसका विरोध नहीं कर पाएगी। शहरी विकास मंत्रालय अब शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी योजना का नए सिरे से नामकरण करने की तैयारी में है। सूत्रों का कहना है कि सरकार जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीकरण मिशन की जगह अब अटल बिहारी वाजपेयी शहरी नवीकरण मिशन योजना ला सकती है। इस तरह से जवाहरलाल नेहरू का नाम इस स्कीम से हट सकता है।

मंत्रालय के अफसरों का कहना है कि जेएनएनयूआरएम योजना का नाम बदलने पर विवाद नहीं होना चाहिए, क्योंकि जेएनएनयूआरएम योजना तो पिछली सरकार के कार्यकाल में ही समाप्त हो गई थी। अब नए नाम के साथ नई योजना आ रही है। इसी तरह से राजीव आवास योजना की जगह भी नई स्कीम आ रही है। उनका कहना है कि पिछली योजनाएं अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सकीं इसलिए उनमें बदलाव भी किया गया है।
मसलन, जेएनएनयूआरएम के तहत 1517 प्रोजेक्ट्स के तहत 14 लाख 41 हजार मकान बनने थे लेकिन इनमें से 8 लाख 31 हजार मकान ही पूरे हुए। अब 2012 तक स्वीकृत हुई योजनाओं के तहत बन रहे मकानों का निर्माण 2015 तक पूरा होना है। इसी तरह राजीव आवास एक लाख 20 हजार मकान बनने थे लेकिन इनमें से 1154 ही पूरे हो सके। चूंकि पिछली स्कीम में कई तरह की दिक्कतें आ रही थीं इसलिए अब सरकार ने तय किया है कि इस योजना में बदलाव किया जाए ताकि हाउसिंग स्कीम को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।


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