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मोदी के देश लौटते ही कांग्रेस ने बोला हमला


Ajay makan

नई दिल्ली ,(एजेंसी) 20 नवम्बर । तीन देशों की यात्रा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लौटने के साथ ही कांग्रेस ने उनकी सरकार पर हमला बोल दिया है। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री देश में कम और विदेश में ज्यादा रहते हैं। पार्टी के प्रवक्ता अजय माकन ने इसके साथ ही कहा कि एनडीए सरकार आई तो थी सबके लिए अच्छे दिन लाने के वादे के साथ लेकिन सरकार के नजदीकी उद्योगपतियों के लिए ही अच्छे दिन आए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने किसान विकास पत्र (केवीपी) को फिर से शुरू किए जाने को लेकर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

माकन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि अदाणी समूह को ऑस्ट्रेलिया में माइनिंग के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने 6200 करोड़ रुपये लोन दिया है। उन्होंने कहा कि छह मल्टिनैशनल बैंकों ने देश के बाहर अदाणी के इस प्रॉजेक्ट को फाइनैंस करने से इनकार कर दियाए सरकार को बताना चाहिए कि किस आधार पर देश के लोगों के खून-पसीने की कमाई से एक उद्योगपति की मदद की जा रही है। माकन ने बीजेपी के अच्छे दिन के चुनावी नारे पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री चुनाव के दौरान उन्हें (बीजेपी को ) मदद करने वाले उद्योगपतियों के अच्छे दिन लााने में जुटे हुए हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता ने काला धन वापस लाने की सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसे कदम उठाए जा रहे हैंए जिससे इसको बढ़ावा मिलेगा। तीन साल बाद किसान विकास पत्र की री-लॉन्च करने के सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए माकन ने कहा कि किसान विकास पत्र को लेकर रिजर्व बैंक ने साल 2011 में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इससे ब्लैक मनी छिपाने में मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि सरकार ने करीब 3 साल बाद किसान विकास पत्र को मंगलवार को फिर से लॉन्च किया। इस बचत योजना में निवेश किया गया धन आठ साल और चार महीने में दोगुना हो जाएगा। इसे दोबारा शुरू करने की मांग काफी समय से हो रही थी। वित्त मंत्रालय ने कहा कि शुरुआत में केवीपी सर्टिफिकेट डाक घरों के जरिए बेचे जाएंगे। बाद में जनता को केवीपी राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं पर भी मिलेंगे। वित्त मंत्रालय ने कहा कि केवीपी न सिर्फ छोटे निवेशकों के लिए निवेश का सुरक्षित विकल्प होगाए बल्कि इसके जरिये देश में बचत दर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि केवीपी योजना अप्रैलए 1988 में शुरू की गई थी। उस समय इस योजना में किया गया निवेश 5.5 साल में दोगुना हो जाता था। नवंबरए 2011 में इस योजना को बंद कर दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय बचत योजनाओं के बारे में भारतीय रिजर्व बैंक के “अपने ग्राहक को जानें”,(केवाईसी) नियम डाक घर और बैंकों पर लागू हैं। इसीलिए केवीपी पर भी ये नियम स्वाभाविक तौर पर लागू होंगे। केवीपी की अधिसूचना के मुताबिक जमाकर्ता रकम का भुगतान चेक से भी कर सकता है और नकद भी। इसका मतलब है कि जमाकर्ता की पहचान तो दर्ज की जाएगी, लेकिन नकद जमा होने की सूरत में यह पता करना मुश्किल होगा कि रकम कहां से आई।


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