Home >> एंटरटेनमेंट >> फिल्म रिव्यूः जेड प्लस (4 स्टार)

फिल्म रिव्यूः जेड प्लस (4 स्टार)


Zed Plus

04 दिसंबर 2014 । प्रमुख कलाकार: आदिल हुसैन, मोना सिंह, मुकेश तिवारी, कुलभूषण खरबंदा और संजय मिश्रा।
निर्देशक: चंद्रप्रकाश द्विवेदी
संगीतकार: सुखविंदर सिंह और नायब।
स्टार: चार
इन दिनों एक तरफ मसाला और दूसरी तरफ कंटेंट प्रधान फिल्में आ रही हैं। ‘जेड प्लस’ कंटेंट प्रधान फिल्म है। मौलिक और इनोवेटिव कहानियों की कंगाली के मौजूदा दौर में ‘जेड प्लस’ फिल्मकारों और दर्शक दोनों के लिए उम्मीद और प्रेरणा की किरण है। यह रामकुमार सिंह की कहानी पर आधारित और डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेद्वी निर्देशित राजनीति पर तंज कसती आला दर्जे की मौलिक सटायर फिल्म है। यह सिस्टम, नौकरशाही और आम आदमी के संबंध-समीकरण की गूढ़ पड़ताल करती है। यह दिखाती है कि सरकार और नौकरशाह के काम करने का तरीका क्या है? वे अपने फायदे के लिए आम आदमी का किस तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। किस तरह सिस्टम के जाल में फंसा कर लोगों की दुश्वारियों का गलत इंटरप्रेटेशन किया जाता है। ‘जेड प्लस’ फिल्मों में स्थापित और प्रचलित स्टार केंद्रित फिल्मों के प्रतिमान पर भी प्रहार करती दिखती है। फिल्म का नायक देश का आम आदमी है। फिल्म के पोस्टर और दृश्यों में वह लुंगी में है। फिल्म की कहानी पूरी तरह उसी के इर्द-गिर्द घूमती है।

जेड प्लस
फिल्म में असलम पंचर वाले की आम से खास होने की कहानी है। वह फतेहपुर में अपनी बीवी हमीदा के साथ संघर्षरत जिंदगी जी रहा है। वह अपने पड़ोसी स्वघोषित शायर हबीब से खासा परेशान है। हालांकि पूर्व में दोनों जिगरी दोस्त रह चुके हैं। वर्तमान में दोनों की दुश्मनी की जड़ में पराई औरत सईदा है। सईदा के लिए दोनों दोस्तों के बीच कश्मीर का रूपक एक स्तर पर भारत-पाकिस्तान का संदर्भ ले लेता है। बहरहाल, असलम पंचर वाला वहां के पीर वाले बाबा की दरगाह का एक दिन का खादिम बनता है और प्रधानमंत्री की आकस्मिक मुलाकात में हुई गलतफहमी के चलते जेड प्लस सुरक्षा पा जाता है। वह सुरक्षा मिलते ही उसकी सामान्य जिंदगी में भूचाल आ जाता है। उसकी जिंदगी जाने-अनजाने केंद्र और राज्य सरकार के बीच झूलने लग जाती है। असलम के संवादों से पता चलता है कि नह हिंदुस्तानी में फरियाद कर रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री उसे अंग्रेजी में समझ रहे थे। इस गफलत में ही वह जेड प्लस सुरक्षा पा जाता है। ‘जेड प्लस’ राजनीति, समाज और आम आदमी के संबंधों पर कटाक्ष करती है।

‘जेड प्लस’ अपने कलाकारों के उम्दा प्रदर्शन व मौलिक कहानी से दिल को छूती है। संवाद भी फिल्म की यूएसपी हैं।

डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेद्वी और रामकुमार सिंह के लिखे संवादों में देशज मुहावरों का सारगर्भित इस्तेमाल किया गया है। वे बेहद सटीक और सधे हुए हैं। वे तीखा प्रहार करते हुए असर छोड़ते हैं। उनके मर्म बड़े गहरे और संदर्भ व्यापक हैं। नायक असलम पंचर वाला की भूमिका आदिल हुसैन ने निभाई है। आदिल ने उसके संग पूरा न्याय किया है। असलम के चरित्र में आए परिवर्तनों को वे प्रभावशाली तरीके से पेश करते हैं। हमीदा मोना सिंह बनी हैं। उनके काम में शिद्दत और ईमानदारी दिखती है। हबीब के अवतार में मुकेश तिवारी पूरे रंग में हैं। उनके अभिनय का नया आयाम दिखाई पड़ा है। प्रधानमंत्री के पीए जनार्दन दीक्षित का किरदार के. के. रैना ने निभाया है। प्रधानमंत्री की भूमिका में कुलभूषण खरबंदा ने रोल को काफी एन्जॉय किया है। संजय मिश्रा खस्ताहाल हो चुके सुपारी किलर और आतंकवादी हिदायतुल्ला की भूमिका में फिल्म की जान हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग लाजवाब है। हृषिता भट्ट सूत्रधार के रोल में हैं। एकावली खन्ना सईदा के किरदार में हैं और उन्होंने उल्लेखनीय काम किया है।

फिल्म का एकमात्र कमजोर पक्ष उसका असरहीन गीत-संगीत है। सुखविंदर सिंह और नायब का संगीत मौजूदा कालखंड के मिजाज को छूने में नाकाम रही है। फिल्म की एडिंटिंग और कसी हुई हो सकती थी


Check Also

टेलीविज़न अभिनेता करणवीर बोहरा ने ‘फादर्स डे’ पर शेयर की ऐसी तस्वीर की फैंस हुए हैरान

आज पूरी दुनिया में फादर्स डे मनाया जा रहे हैं, इस अवसर पर सोशल मीडिया …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *