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दहशत के अंधेरे के बाद सिडनी में उम्मीदों की नई सुबह, मृतकों को श्रद्धांजलि देने उमड़े लोग


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सिडनी, 16 दिसम्बर 2014 । आतंक के अंधेरे के बाद सिडनी में आज उम्मीदों की नई सुबह निकली। लिंट चॉकलेट कैफे में मारे गए बंधकों को श्रद्धांजलि देने जनसैलाब उमड़ पड़ा। सिडनी के सेंट मैरी कैथेड्रल चर्च में प्रार्थना सभा भी हुई। इसमें गोलीबारी में मारे गए कैफे मैनेजर और महिला बैरिस्टर की आत्मा की शांति की दुआ मांगी गई। गोलीबारी में कैफे के मैनेजर और महिला बैरिस्टर की मौत हो गई थी जबकि 4 अन्य घायल हो गए हैं. बंधक बने भारत के विश्वकांत अंकी रेड्डी और पुष्पेंदु घोष बाल-बाल बच गए।

50 साल के बंदूकधारी हारुन मोनिस के मारे जाने के साथ ही 16 घंटे का बंधक संकट खत्म हो गया है। ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स पुलिस को बंदूकधारी के किसी संगठन से जुड़े होने के सबूत नहीं मिले हैं। ऑस्ट्रेलियाई पीएम एबॉट ने कहा है कि बंदूकधारी मानसिक रूप से बीमार था। पुलिस के मुताबिक करीब आधे घंटे में इस ऑपरेशन को अंजाम दे दिया गया। ऑपरेशन के बाद रोबोट के जरिए कैफे की तलाशी ली गई। पुलिस ने कैफे को सुरक्षित घोषित कर दिया है।

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सिडनी के लिंट कैफे में 16 घंटे तक बंधक रहे दो भारतीय भी सुरक्षित बचा लिए गए। विदेश मंत्रालय के बयान के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी ट्वीट कर इसकी पुष्टि की। अंकिरेड्डी विश्वकांत और पुष्पेंदु घोष भी उन 17 लोगों में शामिल थे,जिन्हें बंदूकधारी हारुन मोनिस ने बंधक बना लिया था।

रेड्डी के घर गुंटूर में जश्न
प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस में कार्यरत अंकि रेड्डी के सकुशल बच निकलने पर उनके गृह शहर गंटूर में जश्न छा गया है। अंकि के पिता के मुताबिक अंकि सुबह 10 बजे ऑफिस को निकले थे और रास्ते में कैफे चले गए थे। वहीं वो बंधक बना लिए गए। अंकि पहले मेलबर्न में नेशनल ऑस्ट्रेलियन बैंक में काम करते थे और आठ महीने पहले ही सिडनी पहुंचे थे।

…तो होता काफी खून खराबा
न्यू साउथ वेल्स पुलिस के मुताबिक अगर कमांडो ऑपरेशन नहीं किया जाता तो कैफे के भीतर काफी खून खराबा होता। पुलिस के मुताबिक कैफे के अंदर गोली बारी चलने की आवाज सुनने के फौरन बाद ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। पुलिस कार्रवाई के दौरान गोलीबारी और बम धमाके की आवाजें सुनाई देती रहीं।

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16 घंटे के बंधक संकट के दौरान बंधकों पर से दो बार बंदूकधारी की गिरफ्त ढीली हुई। पहली बार तब जब पांच लोग इमर्जेंसी रास्ते से बचकर भाग निकले। दूसरी बार फिर पांच लोगों का जत्था बाहर निकला। इस जत्थे में भारतीय बंधक अंकि रेड्डी भी शामिल थे। इस जत्थे के निकलने के फौरन बाद गोलीबारी और धमाकों की आवाजें सुनाई देने लगी।

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इसके बाद कुछ बंधक बदहवासी में भागते हुए बाहर निकले। न्यू साथ वेल्स पुलिस के कमांडो भी कैफे के अंदर घुसते हुए दिखे। करीब आधे घंटे में इस ऑपरेशन को अंजाम दे दिया गया। ऑपरेशन के बाद बम होने की आशंका में रोबॉट के जरिए कैफे की तलाशी ली गई।

ईरानी मूल का शरणार्थी है हारुन
न्यू साउथ वेल्स पुलिस ने सिडनी बंधक संकट को आतंकी घटना मानने से इनकार कर दिया है। पुलिस के मुताबिक ये अलग तरह की घटना है और ये महज एक व्यक्ति की करतूत थी। पुलिस के मुताबिक लोगों को बंधक बनाने वाला शख्स ईरानी मूल का शरणार्थी हारुन मोनिस है। वो 1996 में ईरान से भागकर ऑस्ट्रेलिया आ गया था।

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स्वयंभू मौलवी हारुन पर कई आपराधिक केस दर्ज हैं। मोनिस अपनी पत्नी की हत्या की साजिश का भी आरोपी है। वो इन दिनों बेल पर था। उस पर सात महिलाओं से यौन दुर्व्यवहार का भी आरोप है। उसने अफगानिस्तान में ऑस्ट्रेलियाई फौज की मौजूदगी की आलोचना की थी।


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