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विवादों के पुराने ‘महबूब’ हैं शिक्षा मंत्री जी


Mahboob Ali

लखनऊ,(एजेंसी)20 दिसंबर । माध्यमिक शिक्षा मंत्री महबूब अली के खिलाफ लोकायुक्त के यहां शिकायत तो अब हुई है लेकिन विवादों में वह शुरू से घिरे रहे हैं। शिक्षा मंत्री बनते ही उनके फैसलों को लेकर उन पर खूब आरोप लगे। डीआईओएस के तबादले और तैनाती हो या फिर निजी स्कूलों को मान्यता और केंद्र निर्धारण। शिक्षक नेताओं से उनसे छत्तीस का आंकड़ा बना हुआ है।

ताबड़तोड़ तबादलों पर हुआ विवाद
माध्यमिक शिक्षा मंत्री डीआईओएस के तबादलों को लेकर सबसे ज्यादा विवाद में रहे। जुलाई में ही तीन बार में करीब 75 डीआईओएस, उप शिक्षा निदेशकों और संयुक्त शिक्षा निदेशकों के तबादले किए। उसके बाद भी अगस्त सितंबर तक यह सिलसिला चला। इन तबादलों पर काफी विवाद हुआ। कोर्ट की रोक के बाद करीब 35 को पदोन्नति देकर उन्हें प्रभारी डीआईओएस के तौर पर तैनाती भी उन्होंने दे दी। कई डीडीआर को संयुक्त शिक्षा निदेशक का कार्यभार दे दिया। विधान सभा में भी यह मुद्दा उठा था और 15-15 लाख रुपए लेकर तैनाती का आरोप शिक्षा मंत्री के सामने ही सदन के कई सदस्यों ने लगाया था।

1337 निजी स्कूलों को मान्यता
शिक्षा मंत्री ने एकमुश्त 1337 निजी स्कूलों को मान्यता दे दी। इन स्कूलों की मान्यता वर्षों से रुकी हुई थी। हालांकि मंत्री ने इसे पारदर्शिता और उत्पीड़न रोकने की कार्रवाई बताते हुए खुद अपनी पीठ थपथपाई थी लेकिन उन पर लेन-देने करके मान्यता देने और निजी स्कूलों को बढ़ावा देने के आरोप लगे थे।

प्रमुख सचिव बदलने पर लगे आरोप
माध्यमिक शिक्षा के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर चले गए तो उसके बाद एसपी सिंह को यह पद सौंपा गया। उन्होंने नकल माफिया पर लगाम लगाने के लिए कई कदम उठाए। इस पर तुरंत ही हटा दिया गया और जितेंद्र कुमार को प्रमुख सचिव बना दिया। जितेंद्र कुमार पर पहले भी कई विभागों में आरोप लग चुके हैं। इस बदलाव के बाद मंत्री पर ही आरोप लगे कि उन्होंने नकल माफिया के दबाव में यह बदलाव किया।

मॉडल स्कूल और नया सत्र
मॉडल स्कूलों को सीबीएसई बोर्ड से संचालित करने पर भी विवाद उठे। शिक्षकों ने इसे यूपी बोर्ड को खत्म करने की साजिश बताया। उसके बाद शिक्षकों के विरोध के बावजूद अप्रैल से नया सत्र शुरू करने का ऐलान कर दिया। सभी ने आरोप लगाया कि मंत्री निजी स्कूलों के इशारे पर उन्हें ही फायदा पहुंचाने क लिए काम कर रहे हैं।

यूपी बोर्ड की दो सचिव ने छोड़ा पद
यूपी बोर्ड में सचिव के पद पर तैनात शकुंतला यादव ने वीआरएस ले लिया। उनका दो साल का कार्यकाल अभी बाकी था। उसके बाद प्रभा त्रिपाठी को यह पद दिया गया। उन्होंने भी अवकाश ले लिया। हालांकि दोनों ने अपने निजी कारणों और स्वास्थ्य का तर्क दिया था लेकिन विभाग में चर्चा है कि नकल माफिया के दबाव के कारण ही अफसर इस पद पर नहीं रहना चाहते।


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