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आई आई टी डायरेक्टर इस्तीफा विवाद गहराया


नई दिल्ली,(एजेंसी) 28 दिसंबर । दिल्ली आईआईटी के निदेशक रघुनाथ के शेवगांवकर ने आखिर इस्तीफा क्यों दिया? इस सवाल का जवाब गहराता जा रहा है। हालांकि, पहले सचिन की सफाई आई और अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बयान जारी करके कहा है कि उनकी तरफ से निदेशक पर इस्तीफा का दबाव नहीं था।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि उनकी तरफ से निदेशक पर कोई दबाव नहीं था और न मंत्रालय ने और न ही सचिन ने क्रिकेट एकेडमी के लिए ग्राउंड या इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कोई अर्जी लगाई थी।

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की सैलरी के सवाल पर भा HRD मंत्रालय ने सफाई दी और कहा कि इस केस को लेकर भी IIT को कोई अर्जी नहीं दी है। मंत्रालय ने कहा कि इस मामले में DoPT और वित्त मंत्रालय से उनकी राय मांगी गई है।

इसके साथ ही मंत्रालय ने साफ कर दिया कि आईआईटी के चेयरमैन के माध्यम से निदेशक रघुनाथ के शेवगांवकर का इस्तीफा मिला है और इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया है।

आज क्या हुआ?

रविवार को दोपहर में दिल्ली आईआईटी के निदेशक रघुनाथ के शेवगांवकर ने अपने पद से इस्तीफे की पुष्ट की। इससे पहले सचिन और अब एचआरडी मंत्रालय ने सफाई दी है, लेकिन सवाल बना हुआ कि आखिर उन्होंने अपना इस्तीफा क्यों दिया?
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दरअसल मामला ये है कि अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से ये खबर दी थी कि आईआईटी के निदेशक पर सचिन के क्रिकेट एकेडमी के लिए जमीन देने और बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की सैलरी के 70 लाख रुपये देने का दबाव था और इसलिए उन्होंने अपना इस्तीफा दिया है।

हालांकि, सचिन के रिपोर्ट खारिज करने के बाद टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी खबर वापस ले ली थी। अखबार ने माफी मांगते हुए कहा कि सूत्र से खबर छापी गई थी। सचिन से बात नहीं करना चूक थी।
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क्या है मामला और सचिन का पक्ष?

आपको बता दें कि टाइम्स ऑफ इंडिया ने खबर दी थी कि आईआईटी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शेवगांवकर पर एचआरडी मंत्रालय की ओर से कई दिनों से दो मांगो को लेकर दबाव डाला जा रहा था। इनमें पहली मांग है कि क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की क्रिकेट अकेडमी के लिए आईआईटी ग्राउंड उपलब्ध कराना और दूसरी मांग है बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की सैलरी को लेकर। स्वामी ने आईआईटी में 1972 से 1991 तक पढ़ाया था, उसी के एवज में 70 लाख के पेमेंट की बात कही गई है।

सचिन तेंदुलकर ने अखबार के दावे को खारिज करते हुए अपने फेसबुक पेज पर लिखा, ‘मैं इस तरह की खबरें पढ़कर चकित हूं जिनमें कहा गया है मेरे नाम से क्रिकेट अकेडमी खोलने के लिए दिल्ली आईआईटी से जमान मांगी गई है। मेरा ऐसी कोई भी अकेडमी खोलने का विचार नहीं है और न ही मैंने किसी जमीन की मांग की है। इस प्रकार से कोई भी खबर छापने से पहले तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए’।
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वहीं दूसरी तरफ सुब्रमण्यम स्वामी 1972 से लेकर 1991 तक दिल्ली आईआईटी के प्रोफेसर रह चुके हैं। स्वामी अपने इसी कार्यकाल का वेतन मांग कर रहे हैं। सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि मैनें कोर्ट में सारी जानकारी दी। कोर्ट ने मेरे पक्ष में फैसला दिया है। मेरे कार्यकाल का पैसा आईआईटी को मुझे देना पढ़ेगा।’ वहीं आईआईटी का कहना है कि सुब्रमण्यम स्वामी ने सभी जरूरी जानकरी नहीं दी है।
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मंत्रालय का कहना है कि स्वामी पूर्व सांसद हैं और संबंधित अथॉरिटी को इसकी जानकारी दे दी गई है। आईआईटी सूत्रों का कहना है कि शिवगांवकर इन दोनों ही मांगों के खिलाफ हैं वह चाहते कि आईआईटी कैंपस को सिर्फ स्टूडेंट्स और फैकल्टी के प्रयोग के लिए ही रखा जाए।

आईआईटी निदेशक के इस्तीफा का विवाद अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करके कहा, ‘यह जानकार दुख हुआ कि आईआईटी निदेशक ने सरकार के दबाव में इस्तीफा दे दिया है। पहले सरकार ने एम्स में दखल दिया और अब आईआईटी। सरकार को स्वायत्त संस्थाओं से खुद को अलग रखना चाहिए।’


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