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भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन से संतुलित विकास : जेटली


download (2)नई दिल्ली ,(एजेंसी) 5 जनवरी । वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव के खिलाफ आलोचनाओं को एक सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इन बदलाव से जहां भू-स्वामियों को उनकी जमीन का अधिक मुआवजा मिलना सुनिश्चित होगा, वहीं देश की विकास संबंधी जरूरतें भी पूरी होंगी।

जेटली ने फेसबुक पर ‘भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन : सही तस्वीर’ शीर्षक से टिप्पणी की है। इसमें कहा गया है, ‘यह संशोधन ग्रामीण भारत की विकास संबंधी जरूरतों को संतुलित करता है और भूमि स्वामियों के लिए अधिक मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित करता है।’ केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने 31 दिसंबर, 2014 को ‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुर्नस्थापन में उचित क्षतिपूर्ति के अधिकार और पारदर्शिता (संशोधन) अधिनियम, 2013’ में संशोधन संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दे दी।

जेटली ने कहा कि इस कानून में संशोधन करना जरूरी हो गया था क्योंकि भूमि अधिग्रहण कानून, 1894 पुराना पड़ चुका है। वित्त मंत्री ने लिखा है, ‘जो लोग इसके खिलाफ हैं, वह अपनी पार्टी वाली राज्य सरकारों को अध्यादेश के प्रावधानों का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दे सकते हैं। जेटली ने कहा, ‘अध्यादेश लाने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि इस तरह की अधिसूचना को जुलाई-अगस्त 2014 में बजट सत्र में ही संसद के समक्ष पेश करना था। इस तरह की अधिसूचना के लिए 31 दिसंबर 2014 अंतिम दिन था।’


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