Home >> Politics >> डैमेज कंट्रोल में जुटी BJP, निकाय चुनाव के ‌लिए मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी….

डैमेज कंट्रोल में जुटी BJP, निकाय चुनाव के ‌लिए मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी….


भाजपा ने मेयर के चुनाव में पूरी ताकत झोंकने का फैसला लिया है। इसके लिए पार्टी के बड़े नेताओं और वरिष्ठ मंत्रियों को एक-एक निगम का जिम्मा सौंपा जा रहा है। उन्हें लोगों से समन्वय बनाने और उनकी नाराजगी दूर कर जीत पक्की करने को कहा गया है। यह सभी मंत्री चुनावों के दौरान अपनी जिम्मेदारी वाले स्थानों पर कैंप करेंगे।

वैसे तो नगर निकायों में भाजपा का पहले से ही दबदबा रहा है लेकिन, इस बार ये चुनाव तब हो रहे हैं जब नोटबंदी व जीएसटी को लेकर लोगों में भाजपा से नाराजगी की चर्चा है। वर्ष 2012 में अखिलेश यादव सरकार बनने के बाद हुए चुनावों में भाजपा 12 में से 10 नगर निगमों में अपने मेयर जिताने में सफल रही थी। अब प्रदेश व केंद्र में भाजपा की ही सरकार है। निकाय चुनावों के ठीक बाद गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में निकाय चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन का संदेश दूर तक जाएगा।

पार्टी चाहती है कि इस बार उसे 2012 से बड़ी जीत मिले, जिससे वह केंद्रीय नेतृत्व की वाहवाही पा सके। इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार के प्रमुख मंत्रियों को एक-एक नगर निगम में चुनाव जिताने का दायित्व सौंपा गया है। गाजियाबाद में कमल खिलाने का जिम्मा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी के पास है। वहीं लखनऊ में वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल कैंप करेंगे। समझा जा सकता है कि भाजपा ने लखनऊ में राजेश को लगाकर वैश्य और व्यापारी समाज की नाराजगी दूर करने की कोशिश है।

कानपुर मौर्य और आगरा डिप्टी सीएम के हवाले

प्रदेश के सबसे बड़े कानपुर नगर निगम में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और आगरा में डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा पार्टी की जीत के लिए कैंप करेंगे। वे न केवल चुनाव प्रबंधन और रणनीति पर नजर रखेंगे वरन रूठे नेताओं को भी मनाएंगे। आगरा में ब्राह्मण मतदाताओं की अच्छी तादाद के चलते भी डॉ. शर्मा को वहां भेजा जा रहा है। सपा ने वहां ब्राह्मण प्रत्याशी उतारा है। कानपुर में जिस तरह ध्रुवीकरण होता है, उसे देखते हुए ही संभवत: केशव को वहां लगाया गया है।
सहारनपुर व मुरादाबाद में कड़ा मुकाबला
सहारनपुर और मुरादाबाद नगर निगमों में कड़े मुकाबले के आसार हैं। सहारनपुर में विधानसभा चुनाव में भाजपा नगर सीट सपा से हार गई थी। यहां के समीकरण साधने की जिम्मेदारी कृषि मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही को दी गई है। मुरादाबाद में सपा ने पूर्व विधायक यूसुफ अंसारी को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर मुस्लिम आबादी ठीक-ठाक है। भाजपा की तरफ से यहां भी किसी तेजतर्रार मंत्री को भेजे जाने की उम्मीद है।अलीगढ़, मेरठ में ध्रुवीकरण तय
अलीगढ़ में बसपा और सपा ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं। शहर में मुस्लिम आबादी भी काफी है। ऐसे में मुस्लिमों एकजुटता बनी तो भाजपा को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इसी के मद्देनजर हिंदूवादी छवि के मंत्री सुरेश राणा को यहां लगाया है। क्योंकि धुव्रीकरण का फायदा भाजपा को ही मिलेगा। मेरठ की सीट दलित महिला के लिए आरक्षित है। यहां चुनाव जिताने जिम्मा सिद्धार्थनाथ सिंह को मिला है।

मथुरा में श्रीकांत संभालेंगे मोर्चा

मथुरा-वृंदावन नगर निगम के लिए पहली बार चुनाव हो रहा है। मथुरा से विधायक श्रीकांत शर्मा को मथुरा फतह कराने की जिम्मेदारी दी गई है। गाजियाबाद एनसीआर का सबसे प्रमुख नगर निगम है। यहां से राजनाथ सिंह सांसद रह चुके हैं। अब जनरल वीके सिंह सांसद हैं। इस सीट पर मंत्री की जगह पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमापति राम त्रिपाठी को लगाया गया है।
अयोध्या भी बड़ी चुनौती
अयोध्या और वाराणसी नगर निगम को लेकर भाजपा ने खास रणनीति बनाई है। यहां का मोर्चा संभालने के लिए किसी प्रमुख व्यक्ति को लगाने की चर्चा है। गोरखपुर नगर निगम में मंत्री धर्मपाल सिंह और बरेली में बृजेश पाठक को पार्टी को विजयश्री दिलानी है। इलाहाबाद में मंत्री आशुतोष टंडन के साथ ही रीता बहगुणा जोशी भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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