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पेरिस में जुटे अपार जनसमूह ने कहा, ‘आतंकवाद से हम नहीं डरते’


62530-rally पेरिस ,(एजेंसी) 12 जनवरी । फ्रांस में अब तक के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन के तहत लाखों लोगों ने आतंकवाद के खिलाफ मार्च निकाला। इस्लामिक हमलों के पीड़ितों को वैश्विक नेताओं के नेतृत्व में श्रद्धांजलि देने के लिए पेरिस में जुटा यह अपार जनसमूह नारे लगा रहा था- ‘हम नहीं डरते’।

गृहमंत्रालय ने कहा कि कल देश में लगभग 40 लाख लोग सड़कों पर उतरे। कुछ का आकलन है कि अकेले पेरिस में ही लोगों की संख्या 16 लाख की थी। इस जुलूस के दौरान एकता का ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद वैश्विक नेताओं के साथ मिलकर एक-दूसरे के हाथ थामते हुए नजर आए। इन वैश्विक नेताओं में इस्राइली प्रधानमंत्री और फलस्तीनी राष्ट्रपति भी शामिल थे।

उन तीन दिनों के आतंक का शिकार बने लोगों की याद में एक पूरा जनसैलाब सड़कों पर उमड़ आया था। आतंक का वह खूनी खेल बुधवार को शार्ली हेब्दो नामक व्यंग्यात्मक पत्रिका के कार्यालयों पर हमले और जनसंहार के साथ शुरू हुआ था और इसमें कुल 17 लोग मारे गए थे।

विरोध प्रदर्शन में जुटे लोगों के हाथों में तख्तियां थीं, जिनपर लिखा था- ‘मैं फ्रांसिसी हूं और मैं डरता नहीं।’ इसके साथ ही मारे गए कार्टूनिस्ट को श्रद्धांजलि देते हुए कुछ तख्तियों पर लिखा था- ‘मजाक करो, युद्ध नहीं।’ और ‘स्याही बहे, खून नहीं।’

फ्रांस में पिछले 50 सालों के अब तक के सबसे भयावह आतंकी हमले के बाद जब लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बैनर तले एकजुट हुए तो ‘सिटी ऑफ लाइट’ के नाम से मशहूर इस शहर में भावनाओं का सैलाब लोगों की आंखों के रास्ते बह निकला। इसाबेल दहमनी नामक फ्रांसिसी इसाई महिला, जिसने एक मुस्लिम यानी मोहम्मद से शादी की है, वह भी इस मार्च में शामिल हुई थी। वह अपने तीन छोटे बच्चों को यह दिखाने के लिए साथ लेकर आई थीं कि देखो, डरने की कोई बात नहीं है।

इनकी नौ वर्षीय बेटी ने जब भारी हथियारों से लैस इस्लामिक आतंकी बंधुओं सैद और शरीफ कोआची को पत्रिका के कार्यालयों पर हमले करते हुए टीवी पर प्रसारित तस्वीरों में देखा तो उसने रोते हुए पूछा था, ‘क्या ये बुरे लोग हमारे घर में आ रहे हैं?’ हमले के पीड़ितों के शोकाकुल परिवारों ने इस मार्च में एक अहम भूमिका निभाई। इनके साथ-साथ यहां दुनियाभर के लगभग 50 देशों के प्रतिनिधि भी थे। उस समय पूरा दृश्य एकदम भावुक हो गया, जब शार्ली हेब्दो के स्तंभकार पैट्रिक पेलोक्स सुबकते हुए ओलांद से लिपट गए।

बहुत से वैश्विक नेताओं की मौजूदगी के साथ ही राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी की गई है। पुलिस के बंदूकधारी छतों पर तैनात हैं, इसके साथ ही सादे कपड़ों में पुलिस अधिकारियों को भीड़ के बीच भी लगाया गया है। ओलांद ने कहा, ‘आज, पेरिस विश्व की राजधानी है।’ ‘पूरा देश उठ खड़ा होगा।’ पेरिस के अलावा फ्रांस के अन्य शहरों में भी लाखों लोग सड़कों पर जुटे। बर्लिन, ब्रसेल्स, इस्तामबुल और मेड्रिड के अलावा अमेरिकी एवं कनाडियाई शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए।


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