Home >> बिज़नेस >> नोटबंदी से गरीबों को हुई तकलीफ, अमीर और अमीर बने: हुड्डा

नोटबंदी से गरीबों को हुई तकलीफ, अमीर और अमीर बने: हुड्डा


आने वाली 8 नवंबर को नोटबंदी को एक साल पूरा हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को ही नोटबंदी का ऐलान किया था. उसके बाद से ही यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है. यह एक सफल फैसला था या फिर एक फेलियर इस मुद्दे पर बात करने के लिए आज दिन भर ‘आजतक’ पर कई केंद्रीय मंत्री रहेंगे और इन सवालों का जवाब देंगे. कार्यक्रम में विपक्ष और अन्य फील्ड के कई लोग शामिल होंगे.

नोटबंदी से गरीबों को हुई तकलीफ, अमीर और अमीर बने: दीपेंद्र हुड्डा (एंकर – राहुल कंवल)

केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि 2014 में देश ने हमें भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के लिए वोट दिया. 1971 में वांछु कमेटी की रिपोर्ट ने नोटबंदी की अपील की थी लेकिन तत्कालीन PM इंदिरा गांधी ने वोटबैंक के लिए इसे लागू करने से मना कर दिया था.

कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा बोले कि आरबीआई ने कहा कि 99 फीसदी कैश वापस आ गया है, यानी काला धन को लेकर जो उद्देश्य था वो नहीं हो पाया. अर्थव्यवस्था पिछले कुछ समय में नीचे गई है. उन्होंने कहा कि क्या कारण है कि सबसे ज्यादा अमीर और भी अमीर हुए हैं.

नोटबंदी देश में ईमानदारी की शुरुआत: रविशंकर प्रसाद (एंकर- श्वेता सिंह)

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आजतक के कार्यक्रम में कहा कि नोटबंगी भारत को ईमानदार बनाने की कोशिश है. तीन साल में मोदी सरकार ने कालेधन के खिलाफ लड़ाई छेड़ी है. नोटबंदी से 99 फीसदी पैसा बैंकों में वापस आया. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सिर्फ 1.5 लाख लोगों ने 5 लाख करोड़ रुपए जमा किया, अब सरकार के पास हर किसी की जानकारी है.

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कई जगह पर एक ही बिल्डिंग में 100-100 कंपनियां चलती थी. एक ही कंपनी के 2000 बैंक खाते थे, अब ऐसी सभी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई चल रही है. केंद्रीय मंत्री बोले कि अब लोग बिजली का बिल भी जमा कर रहे हैं और नगर पालिकाओं का बिल भी दे रहे हैं. पिछले कुछ समय में डिजिटल पेमेंट में काफी बढ़ोतरी हो रही है.

केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने कार्यक्रम में कहा कि नोटबंदी का अभियान कालेधन को खत्म करने के लिए चलाया गया था. जब तक पैसा कैश फॉर्म में था उसका कोई नाम नहीं था, लेकिन जब पैसा बैंक में आया तो उसका नाम हो गया. अब हमें पता है कि कितना पैसा किसके पास है. अब आपको बताना पड़ता है कि आपके पास ये पैसा कहां से आया.

प्रभु बोले कि कालेधन को खत्म करने के लिए समय लगेगा, लेकिन हमारी सरकार ने अभियान की शुरुआत की है. आम आदमी को इससे परेशानी नहीं है. दुनिया में काफी समय से डिजिटल इकोनॉमी चल रही थी. अब भारत में भी इसकी जागरुकता बढ़ी है.

पीयूष गोयल बनाम सचिन पायलट – (एंकर – राहुल कंवल)

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कार्यक्रम में कहा कि नोटबंदी के बाद से कैशलेस में बढ़ोतरी हुई है. नोटबंदी के बाद से ही कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है. केंद्रीय मंत्री बोले कि हमारी सरकार ने 2014 के बाद से ही कालेधन के खिलाफ लड़ाई जारी है और आगे भी रहेगा. नोटबंदी का निर्णय RBI के बोर्ड के आधार पर केंद्रीय कैबिनेट ने लिया था.

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि सरकार को लगता है कि नोटबंदी के कारण बहुत अच्छा काम किया है. नोटबंदी के कारण कई लोगों की मौत हुई थी. उन्होंने कहा कि आज तक ये नहीं पता लगा है कि ये निर्णय सरकार का था या फिर आरबीआई का. 500-1000 का नोट बंद किया तो 2000 का नोट क्यों लाए.

ये है पूरा कार्यक्रम –

नोटबंदी से क्या मिला?

पीयूष गोयल, रेलमंत्री

सचिन पायलट, कांग्रेस नेता

इंडस्ट्री का नफा-नुकसान

सुरेश प्रभु, कॉमर्स मंत्री

नोटबंदी पर जश्न क्यों?

रविशंकर प्रसाद, कानून मंत्री

इंडस्ट्री पर नोटबंदी का क्या असर?

 

राजीव तलवार, CEO & Whole-time Director, DLF Limited ·

संजय सेठी, Co-founder & CEO, Shopclues.com

बिपिन प्रीत सिंह, Founder CEO & Director, MobiKwik

कुंवर सचदेव MD, Su-Kam Power Systems

नोटबंदी पर विशेषज्ञों की राय

सुरजीत भल्ला, सदस्य, प्रधानमंत्री आर्थिक एडवाइजरी काउंसिल

प्रोफेसर अरुण कुमार, जेएनयू

नोटबंदी का किसानों पर असर

महेश शर्मा, केंद्रीय मंत्री

दीपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस नेता

नोटबंदी: ब्लैक और व्हाइट

जयंत सिन्हा, केंद्रीय मंत्री

रणदीप सुरजेवाला, कांग्रेस नेता

 नोटबंदी

बिबेक ओबरॉय, सदस्य, नीति आयोग

नोटबंदी: कालादिवस क्यों?

पी. चिदंबरम, पूर्व वित्तमंत्री

नोटबंदी: पक्ष और विपक्ष

प्रकाश जावड़ेकर, केंद्रीय मंत्री

अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस नेता

आने वाली 8 तारीख को सरकार बनाम विपक्ष

आपको बता दें कि आने वाली 8 तारीख को एक ओर सरकार जहां इसे एंटी ब्लैक मनी डे के रूप में मनाएगी. तो विपक्ष भी पूरे देश में इसे कालाधन दिवस के रूप में मनाएगा और सरकार पर हमला बोलेगा. पीएम मोदी भी लगातार वार कर रहे हैं कि विपक्ष 8 नवंबर को मोदी का पुतला फूंकने की तैयारी में है.

RBI की रिपोर्ट पर जेटली की सफाई- पैसे जमा करना नहीं था नोटबंदी का मकसद

8 नवंबर 2016 को लागू हुई थी नोटबंदी

गौरतलब है कि पिछले साल 8 नवंबर को रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोटों पर पाबंदी की घोषणा की थी. जिसके बाद लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. नोटबंदी के बाद बड़ी तादाद में फर्जी कंपनियों के जरिए नकद राशि जमा कराने जैसी घटनाएं सामने आई थीं.

हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों ने भी सबको हैरान कर दिया था. जिसमें कहा गया था कि नोटबंदी के बाद 99 फीसदी पुराने वोट बैंकिंग सिस्टम में वापस आए हैं. विपक्ष ने इस पर सवाल उठाते हुए मोदी सरकार के फैसले को कालाधन को सफेद करने वाला कदम करार दिया था.

इसे भी पढ़ें: नोटबंदी, वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक और राष्ट्रीय भ्रम

क्या था आरबीआई की रिपोर्ट में

बता दें कि वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने बताया था कि 8 नवंबर तक 6.86 करोड़ रुपये से ज्यादा के 1000 के नोट सर्कुलेशन में थे. मार्च 2017 तक सर्कुलेशन वाले 1000 के नोट कुल नोटों का 1.3 फीसदी थे. इसका मतलब 98.7 फीसदी नोट RBI में लौट आए थे . इसका मतलब 98.7 फीसदी 1000 के नोट ही आरबीआई में वापस आए हैं.

वित्त वर्ष 2016 में रिजर्व बैंक को करेंसी छापने के लिए 3,421 करोड़ रुपये खर्च किए थे वहीं नोटबंदी के बाद वित्त वर्ष 2017 में यह खर्च बढ़कर 7,965 करोड़ रुपये हो गया.


Check Also

आज Indian railway ने 36 ट्रेनों को किया डायवर्ट, पढ़े पूरी खबर

रेलवे ने 28 जुलाई 2021 को 36 ट्रेनों को डायवर्ट कर दिया है या फिर …