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सरकार के इस प्‍लान से डिजिटल ट्रांजेक्शन को मिलेगा बढ़ावा, ऑनलाइन पेमेंट से हटेगा GST


डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल करके पेमेंट करने वालों को सरकार फायदा दे सकती है। अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन, कार्ड स्वाइप, मोबाइल वॉलेट का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करेगा, उसको सरकार जीएसटी पर छूट भी देगी। इनसे 18 फीसदी जीएसटी चार्ज नहीं लिया जाएगा। इस बात का फैसला जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद शुक्रवार को लिया जा सकता है।
 
डिजिटल ट्रांजेक्शन को देना है बढ़ावा
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार का मकसद डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने का है, ताकि लोग इसका ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें। अभी ऐसे ट्रांजेक्शन करने पर भी टैक्स देना पड़ता है, जिसकी वजह से लोग इसका प्रयोग बहुत कम कर रहे हैं। 

कारोबारियों को भी होगा फायदा
सरकार उन कारोबारियों को भी फायदा देंगें जो जीएसटी नेटवर्क से जु़ड़े हुए हैं। अगर कोई कारोबारी अपना टैक्स भी ऑनलाइन भरता है, तो उसको भी टैक्स में छूट देने के साथ-साथ कैशबैक या फिर अलग से इनाम दिया जा सकता है।  

कार्ड स्वाइप करने पर मिल सकती है छूट

अभी अगर कोई व्यक्ति अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड के जरिए स्वाइप मशीन के जरिए पेमेंट करता है, तो बैंक दुकानदार से कुल अमाउंट का 1 फीसदी चार्ज लेता है। इस वजह से दुकानदार 200 रुपये तक का छोटा पेमेंट कार्ड से नहीं लेते हैं। बड़ा पेमेंट क्रेडिट कार्ड से स्वाइप कराने पर 1 फीसदी चार्ज लेते हैं। 
122 फीसदी से बढ़ा डिजिटल लेनदेन
नोटबंदी ने भारत को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अन्य देशों के मुकाबले तीन वर्ष आगे पहुंचा दिया है। बाजार में चल रहे विभिन्न प्रकार के प्रीपेड उपकरण जैसे मोबाइल वॉलेट, पीपीआई कार्ड, पेपर वाउचर और मोबाइल बैंकिंग में भी एक साल पहले के मुकाबले 122 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

डिजिटल भुगतान बना रीढ़ की हड्डी
उल्लेखनीय है कि भारत की उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी और डिजिटल भुगतान रीढ़ की हड्डी है। देश के टोल प्लाजा, बस, रेलगाड़ी, सिनेमा टिकट आदि की खरीदारी, ई-कामर्स साइट से ऑनलाइन खरीदारी, पेट्रोल पंप, रेस्तरां आदि में करीब 15 करोड़ भारतीय नियमित रूप से डिजिटल साधनों से भुगतान कर रहे हैं।

इस समय करीब एक करोड़ कारोबारी भी डिजिटल भुगतान स्वीकारने में सक्षम हैं। मान लिया जाए कि यदि हर डिजिटल भुगतान करने वाला यदि हर महीने करीब तीन हजार रुपये भी इस तरीके से खर्च करता है तो हम रोजाना लगभग एक करोड़ लेन देन डिजिटल तरीके से करते हैं।

 

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