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अलवर हमले में गौरक्षा के नाम पर लूटपाट करने वाले गैंग का हाथ, 1 गिरफ्तार


अलवर जिले में गौरक्षा के नाम पर लूटपाट करने वाली गैंग का पर्दाफाश हुआ है. बताया जा रहा है कि इस गैंग ने गोविंदगढ़ में अपने साथियों के साथ गाय लेकर जा रहे उमर खां की हत्या की थी.

पुलिस अधीक्षक अलवर राहुल प्रकाश ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने गैंग के सरगना को हिरासत में लिया है और पुलिस इसके बाकी साथियों की तलाश कर रही है.

पुलिस के मुताबिक, आरोपी नाबालिग है. उसकी उम्र 16 साल है. उसे बाल अपचारी अपराध की धारओं के तहत उसे गिरफ्तार किया है. पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया है कि इसके गैंग के 6 लोगों ने इस वारदात को अंजाम दिया था. उमर की हत्या के बाद उसके शव को रेलवे लाइन पर हादसा दिखाने के लिए रख आए थे.

पुलिस बाकी के 6 आरोपियों को पकड़ने की कोशिश कर रही है. दरअसल, इस नाबालिग ने गो-रक्षा दल बना रखा है. जिसके जरीए हाईवे पर लूटपाट करता है. लोगों के पर्स छिनने से लेकर लूट की गाड़ियों को आटो पार्टस भी बेचने का काम करता है. उधर, बाकि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी को लेकर मेव समाज आज अपने आंदोलन की घोषणा करेगा.

मालूम हो कि अलवर जिले से पिकअप में गाय लेकर भरतपुर के घाटमिका गांव जा रहे तीन मुस्लिम युवकों पर शुक्रवार सुबह इस गैंग ने हमला कर दिया. हमले में गोली लगने से उमर खान की मौके पर मौत हो गई. जबकि उसके साथी ताहिर का हरियाणा के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है. वहीं, ड्राइवर जावेद उर्फ जफ्फार हरियाणा के नूह में निजी अस्पताल में भर्ती है.

पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि यह गैंग गोरक्षक बनकर कर लूट की वारदात को अंजाम देती थी. आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से उमर खां की हत्या कर शव को रेलवे पटरी पर डाल दिया था और गाड़ी के टायर और इंजन के पार्ट्स चोरी कर फरार हो गए थे. 

वहीं, इस मामले में मृतक उमर के परिजनों का आरोप है कि पुलिस के साथ हिंदूवादी संगठन के लोगों ने गाय लेकर जा रहे युवकों से मारपीट की इसके बाद गोली मार कर हत्या की गई और शव को रेलवे पटरी पर डाला गया है ताकि शव की शिनाख्त ना हो सके.

पीड़ित परिवार ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और गोविंदगढ़ थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज करवाया गया है. डॉक्टरों ने हड़ताल की वजह से शव को पोस्टमार्टम के लिए जयपुर एसएमएस के लिए भेज दिया है.

पुलिस पर भी उठा सवाल

बड़ा सवाल तो पुलिस पर भी उठ रहा है. क्या पुलिस को इस मामले का पहले से पता था. दरअसल, जिस दिन उमर की हत्या हुई थी उस दिन सड़क किनारे मिली गाड़ी में गाय को बरामद दिखाकर इनके खिलाफ ही गो तस्करी का मामला दर्ज कर लिया था. जब गो तस्करी का मामला दर्ज किया तो फिर मामले की जांच क्यों नहीं की. अगर मामले की जांच होती तो घटना के दिन यानी 10 नवंबर को ही सच सामने आ जाता.


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