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छत्रपति शिवाजी महाराज का ‘अभेद्य दुर्ग’ रहा है नौंवी शताब्दी का जिंजी किला

भारत में ऐसे कई किले हैं जो सदियों से इतिहास की कहानियां बयां कर रहे हैं। उन्हीं में से एक है जिंजी किला, जिसे जिंजी दुर्ग या सेंजी दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है। पुडुचेरी में स्थित यह किला दक्षिण भारत के उत्कृष्टतम किलों में से एक है। इस किले का निर्माण नौंवी शताब्दी में संभवत: चोल राजवंशों द्वारा कराया गया था। इस किले की खूबसूरती ये है कि यह सात पहाड़ियों पर निर्मित कराया गया है, जिनमें कृष्णगिरि, चंद्रागिरि और राजगिरि की पहाड़ियां प्रमुख हैं। यह किला इस प्रकार निर्मित है कि छत्रपति शिवाजी ने इसे भारत का सबसे ‘अभेद्य दुर्ग’ कहा था। वहीं अंग्रेजों ने इसे ‘पूरब का ट्रॉय’ कहा था। ऊंची दीवारों से घिरा हुआ यह किला रणनीतिक रूप से इस प्रकार बनाया गया था कि दुश्मन इस पर आक्रमण करने से पहले कई बार जरूरत सोचते थे। चूंकि यह किला पहाड़ियों पर स्थित है, इसलिए आज भी यहां के राज दरबार तक दो घंटे की चढ़ाई के बाद ही पहुंचा जा सकता है। यह किला लगभग 11 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला है, …

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अब मात्र 6 मिनट में चलेगा कैंसर का पता

नई दिल्‍ली: अभी तक कैंसर का पता लगाने के लिए लोगों को लंबे चेकअप से गुजरना पड़ा था, लेकिन ताइवान ने ऐसी तकनीक विकसित करने का दावा किया है जो 10 प्रकार के कैंसर के बारे में मात्र छह से 15 मिनट में पता लगा सकता है। नेशनल सिंक्रोट्रॉन रेडिएशन रिसर्च सेंटर (NSRRC) के अनुसार, यह तकनीक इंफ्रारेड वैक्स फिशोरेशन कैनेटीक्स (iR-WPK) पर काम करती है, जो कोशिकाओं की सतह पर ग्लाइकान की परत पर अनियमितता को दर्शाती है। इस परत पर असामान्यताएं प्रारंभिक कैंसर कोशिका वृद्धि का सूचक हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि कोलोरेक्टल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, गैस्ट्रिक कैंसर, ओरल कैंसर, ओवेरियन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, स्किन कैंसर, न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर और ग्लियोब्लास्टोमा की पहचान की जा सकती है। पारंपरिक तरीकों से परिणाम जानने में घंटों का समय लगा जाता है। यह तकनीक कैंसर के विकास के साथ-साथ अनिश्चित परिस्थितियों में स्पॉटिंग का एक कुशल और प्रभावी तरीका प्रदान करती है। इसे ताइवान, जापान, अमेरिका और यूरोपीय संघ में पेटेंट कराया गया है। NSRRC के एक सहयोगी अनुसंधान वैज्ञानिक ली याओ-चंग ने भी एक प्रकार का सॉफ्टवेयर विकसित किया …

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कलयुगी बाप : एक नवजात बच्चे के शव को पिता ने अपनाने से मना किया

कलकत्ता में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल प्रशासन पर कई सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक नवजात बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया है क्योंकि एसएसकेएम राजकीय अस्पताल में एक नवजात बच्चे का शव मिला है, जिसे उसका पिता अपनाने के लिए मना कर रहा है। बाबू मंडल (बच्चे का पिता) का कहना है कि यह शव उसके बच्चे का नहीं है लेकिन अस्पताल का कहना है कि यह शव उसके बच्चे का है लेकिन वो इसे स्वीकार करने से इनकार कर रहा है। इसी बीच बाबू मंडल ने कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर अपने बच्चे को वापस लेने की मांग की है। कोर्ट ने कहा कि जब 13 अक्तूबर को दोबारा मामले पर सुनवाई होगी, तब राज्य की ओर से डीएनए और पोस्टमार्टम रिपोर्ट दोनों एक साथ दिखाई जाएंगी। कोर्ट की एक डिवीजन बेंच में न्यायधीश संजीब बनर्जी और अरिजीत बनर्जी शामिल थे। बेंच ने निर्देश दिए कि बच्चे के शव का एक बार फिर पोस्टमार्टम किया जाएगा। ये पोस्टमार्टम एसएसकेएम राजकीय अस्पताल के बाल रोग विभाग की ओर …

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वास्तुशास्त्र में झाड़ू को लक्ष्मीजी का प्रतीक माना गया है शनिवार के दिन झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है: धर्म

सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार जिस घर में स्वच्छता होती है वहां नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं। साफ-सुथरे घर में मां लक्ष्मी का निवास होता है। यही कारण है कि दिवाली व अन्य त्योहारों पर हम अपने घरों की विशेष साफ-सफाई करते हैं जिससे घर में मां लक्ष्मी का आगमन हो। वास्तुशास्त्र में झाड़ू को लक्ष्मीजी का प्रतीक माना गया है। इसलिए यदि झाड़ू को ठीक ढंग से न रखा जाए तो इसका दुष्प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार झाड़ू रखने में क्या सावधानियां रखनी चाहिए। 1- वास्तु शास्त्र के अनुसार सूर्यास्त के बाद यानी संध्या के समय व रात को झाड़ू लगाना अशुभ माना गया है। मान्यता के अनुसार संध्या होने के बाद झाड़ू लगाने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं और घर में दरिद्रता आती है। इसलिए प्रयास करें कि शाम या रात के समय घर या ऑफिस में झाड़ू न लगाएं। 2- वास्तुशास्त्र के अनुसार अगर नई झाड़ू खरीदनी हो तो शनिवार के दिन खरीदनी चाहिए। शनिवार के दिन झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। इससे मां लक्ष्मी के …

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रोचक: 76 साल बाद अक्तूबर का महीना होगा बेहद खास पूरी दुनिया में चांद हो जाएगा नीला

खगोलीय घटनाओं के शौकीन लोगों के लिए अक्तूबर का महीना बेहद खास होने वाला है। जब उन्हें आसमान में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान यानी 76 वर्ष बाद घटित होने वाली दुर्लभ खगोलीय घटना को देखने का मौका मिलेगा। इस घटना के दौरान चांद की खूबसूरती आम दिनों की अपेक्षा कई गुना बढ़ जाएगी। विज्ञान की भाषा में इसे नीले चांद (ब्लू मून) का नाम दिया है। अमूमन कुछ दशकों के अंतराल पर यह खगोलीय घटना होती है। मगर वर्ष 1944 के बाद अब पहली बार इसे साउथ अमेरिका, भारत, यूरोप, एशिया समेत पूरे विश्व से देखा जा सकेगा। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 31 अक्तूबर 2020 के बाद ये दुर्लभ नजारा को 19 वर्ष के बाद 2039 में देखा जा सकेगा। इस घटना का नजारा मनमोहक होने के साथ खगोल विज्ञान में रूचि रखने वालों के लिए बेहद अनोखा होगा। उन्होंने बताया कि फूल मून की घटना 29 दिनों के अंतराल पर होती है। जबकि एक महीने में 30 या 31 दिन होते हैं। ऐसे में एक महीने के अंदर दो फूल मून …

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सबसे ज्यादा ख़ुश रहते हैं मिज़ोरम और पंजाब में रहने वाले लोग

हाल ही में देश के पहले हैप्पिनेस इंडेक्स की रिपोर्ट जारी कर दी गई है। जी दरअसल इसे आईआईएम और आईआईटी में प्रोफ़ेसर रहे राजेश पिलानिया ने तैयार किया है। आपको बता दें कि वह देश के प्रमुख प्रबंधन रणनीति विशेषज्ञों में से एक हैं। वहीं उनके मुताबिक मिज़ोरम और पंजाब में रहने वाले लोग सबसे ज़्यादा ख़ुशहाल हैं। आप सभी को बता दें कि देश में पहली बार हुए हैपीनेस सर्वे में सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया था। यह सर्वे मार्च 2020 से जुलाई 2020 के बीच हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार इसमें देशभर के 16,950 लोगों ने हिस्सा लिया और इसके अनुसार मिज़ोरम, पंजाब, अंडमान निकोबार में रहने वाले लोग सबसे अधिक ख़ुश हैं। वहीं इस मामले में हरियाणा, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सबसे निचले पायदान पर आया है। यह है पूरी लिस्ट: यह रिसर्च इन 6 पैरामीटर्स के आधार पर की गई है: 1। काम संबंधी मुद्दे जैसे आय और ग्रोथ 2। पारिवारिक संबंध और दोस्ती 3। शारीरिक और मानसिक सेहत 4। सामाजिक मुद्दे और परोपकार 5। धर्म या आध्यात्मिक जुड़ाव 6। …

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एक ऐसी महिला जासूस, जिसने कई सेना को अपनी चालाकी से था हराया

यदि कोई महिला सुन्दर हो, बिंदास हो, गजब की लड़ाका सैनिक हो तथा चतुर जासूस हो, तो उसके बारे में आप क्या कहेंगे। जासूसी स्टोरी में किसी महिला का लड़ाका होना हमेशा ही अट्रेक्टिव करता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि महिलाओं का इस प्रकार की भूमिका में कम देखा जाना तथा जो चीज नार्मल नहीं होती है वो हमेशा अट्रेक्ट करती है। ऐसी ही एक महिला जासूस थी नैंसी ग्रेस ऑगस्ता वेक। इन्हें सभी नैंसी वेक भी कहते थे। वही दूसरे वर्ल्ड वॉर की लोकप्रिय महिला लड़ाकों में से एक नैंसी वेक का जन्म न्यूजीलैंड में 30 अगस्त 1912 को हुआ। किन्तु उनका पालन-पोषण ऑस्ट्रेलिया में हुआ। 16 वर्ष की उम्र में नैंसी विद्यालय से भाग गईं तथा फ्रांस में बतौर रिपोटर काम करने लगीं। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने यह जॉब पाने के लिए झूठ बोला कि वह मिस्र की हिस्ट्री के बारे में काफी कुछ जानती हैं तथा इस बारे में लिखना चाहती हैं। साथ ही फ्रांस में उन्हें व्यवसायी हेनरी फिओक्का से प्यार हो गया तथा दोनों ने शादी कर ली। वर्ष 1939 में …

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आलू के अभाव में इस जगह गई थी लाखों लोगों की जान

COVID-19 से ग्रसित नेटिव अमेरिका को आयरलैंड आर्थिक रूप से सहायता पहुंचा रहा है. इसका कारण 173 वर्ष पुरानी वो छोटी सी सहायता है, जो उन्होंने आयरलैंड में आए आलू के अभाव के वक़्त की थी. इस अकाल में लाखों आयरिश व्यक्तियों की जान चली गई थी. आज हम आपको आयरलैंड में आए आलू के अकाल के बारे में जानकारी देंगे, जिसका आरम्भ वर्ष 1845 में हुआ था. दरअसल, उस वक़्त आयरलैंड में P. infestans नाम के एख खास फंगस ने आलू की कृषि को पूर्ण रूप से तबाह कर दिया था. ये सिलसिला एक या दो वर्ष नहीं बल्कि पूरे सात वर्ष के पश्चात् 1852 में थमा. तब तक भुखमरी तथा खराब आलू खाने से 10 लाख से अधिक आयरिश मनुष्यों की मौत हो चुकी थी. वहीं लाखों मनुष्य आयरलैंड छोड़कर दूसरे देशों में चले गए थे. ऐसा कहा जाता है कि आलू के अकाल की वजह से आयरलैंड की आबादी में 25 फीसदी तक कम आ गई थी. वही आलुओं में फंगस लगने के कारण आयरिश नेताओं ने क्वीन विक्टोरिया को भुखमरी फैलने के बारे में बताया, तथा …

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जाने कैसे कोरोना के बाद बदल गई थाईलैंड के स्कूल के बच्चों की जिंदगी

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपने कब्जे में ले लिया है. सभी इससे बचने के लिए कई तरह के तरीकों को अपनाने के बारे में सोच रहे हैं. वैसे कोरोना जब आया तब लॉकडाउन लगा दिया गया था लेकिन अब छूट के साथ बहुत कुछ खोला जा चुका है. वैसे छूट के दौरान भी कुछ नियम कायदे हैं जिनका पालन सभी को करना पड़ता है. अब हाल ही में कुछ फोटोज आई हैं जो थाईलैंड के स्कूलों की है. इन तस्वीरों को देखकर आपका दिमाग एक ही जगह स्थिर हो सकता है क्योंकि यह बहुत ही मार्मिक है. स्कूल जहाँ बच्चे खुलकर जीते हैं अब वहां उन्हें कैद में रहना पड़ रहा है. जी दरअसल स्कूल में अब सख्त नियम लागू हो चुके है. ऐसे में यह तस्वीरें दिल को छू लेने वाली है. अब यहाँ के स्कूल में हर क्लास में एक बार में 25 बच्चों को ही एंट्री दी जाती है. वहीं स्कूल के दरवाजे, डेस्क और बाकी के एरिया को बार बार सैनिटाइज करने का काम होता है. इसी के साथ यहाँ बच्चों को हरदम मास्क …

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क्या आपने कभी बैंगनी रंग का पपीता खाया या फिर देखा है, जानिए कहाँ मिलते हैं?

दुनियाभर में कई चीजें हैं जिन्हे आपने शायद ही देखा होगा. इसी क्रम में शामिल है बैंगनी रंग का पपीता. जी हाँ, क्या आपने कभी बैंगनी रंग का पपीता खाया या फिर देखा है? वैसे हमे यकीन है आपका जवाब होगा नहीं. वैसे अगर आपका जवाब नहीं है, तो इस यूनिक पपीते के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं. जी दरअसल हाल ही में आईएफएस सुशांता नंदा ने इस खास पपीते की कुछ तस्वीरें ट्विटर पर शेयर कर दी है जो बड़ी बेहतरीन दिखाई पड़ रहीं हैं. हाल ही में उन्होंने इस बारे में बताया है. उन्होंने कहा है कि, ‘बैंगनी पपीते का मिलना काफी मुश्किल होता है क्योंकि यह पीपते और अंगूर का एक दुर्लभ मिश्रण होता है जिसे आप केवल दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील में पा सकते हैं.’ वैसे उनकी इस पोस्ट ने इस समय बहुत से लोगों को शॉक दे दिया क्योंकि अधिकतर यूजर्स ऐसे हैं जिन्होंने आज पहली बार बैंगनी रंग के पपीते को देखा है. वैसे कई लोगों ने इसके स्वाद की कल्पना की और कुछ ने पूछ लिया कि बैंगनी पपीता, …

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