Sunday , 16 December 2018
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सोच के मुताबिक बनता है कर्म

दो मित्र अक्सर एक वेश्या के पास जाया करते थे। एक शाम जब वे वहां जा रहे थे, रास्ते में किसी संत का आध्यात्मिक प्रवचन चल रहा था। एक मित्र ने कहा कि वह प्रवचन सुनना पसंद करेगा। उसने उस रोज वेश्या के यहां नहीं जाने का फैसला किया। दूसरा व्यक्ति मित्र को वहीं छोड़ वेश्या के यहां चला गया। अब जो व्यक्ति प्रवचन में बैठा था, वह अपने मित्र के विचारों में डूबा हुआ था। सोच रहा था कि वह क्या आनंद ले रहा होगा और कहां मैं इस खुश्क जगह में आ बैठा। मेरा मित्र ज्यादा बुद्धिमान है, क्योंकि उसने प्रवचन सुनने की बजाए वेश्या के यहां जाने का फैसला किया। उधर, जो आदमी वेश्या के पास बैठा था, वह सोच रहा था कि उसके मित्र ने इसकी जगह प्रवचन में बैठने का फैसला करके मुक्ति का मार्ग चुना है, जबकि मैं अपनी लालसा में खुद ही आ फंसा। प्रवचन में बैठे व्यक्ति ने वेश्या के बारे में सोचकर बुरे कर्म बटोरे। अब वही इसका दुख भोगेगा। गलत काम की कीमत आप इसलिए नहीं चुकाते, क्योंकि आप वेश्या ... Read More »

आखिरकार टूट गया भाजपा का तिलिस्‍म, मजबूत प्रतिद्वंदी बनकर फिर सामने आई कांग्रेस

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव नतीजों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के इर्द-गिर्द बना अपराजेयता का तिलिस्म टूट गया। यहां तक कि राहुल गांधी ने हिंदी पट्टी के इन तीन प्रमुख राज्यों में अपनी पार्टी को बहुमत या उसके करीब पहुंचाते हुए खुद को एक गंभीर प्रतिद्वंद्वी के रूप में साबित कर दिया है। राहुल गांधी की अगुआई में पहली बार पार्टी को चुनावी जीत मिली है। राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के एक साल बाद उनकी पार्टी को पूवरेत्तर (मिजोरम) और दक्षिण (तेलंगाना) में भले ही पराजय ङोलनी पड़ी हो, लेकिन हिंदी पट्टी के तीन बड़े राज्यों में मिली इस सफलता ने उसे वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले संजीवनी प्रदान कर दी है। हालांकि उसकी आगे की राह अभी आसान नहीं रहने वाली है। इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि कुछ हिस्सों में राहुल की रणनीति के सकारात्मक नतीजे नहीं मिले। जैसे तेलंगाना में तेलुगु देशम पार्टी के साथ गठबंधन का फॉमरूला कारगर नहीं रहा। ना ही उनकी पार्टी मिजोरम में एंटी-इनकम्बैंसी को थाम ... Read More »

वक्त की मांग को पूरा करने के लिए जरूरी है कोयले से बनने वाली तापीय बिजली

देश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए जरूरी है कि अगले कुछ वर्षों में तापीय और साथ ही अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता में विस्तार हो। अक्टूबर 2018 में व्यस्त समय यानी पीक ऑवर में बिजली की मांग 180 गीगावाट तक पहुंच गई थी। यह अब तक की सबसे ऊंची मांग है। इसके उलट चालू वित्त वर्ष में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में केवल तीन गीगावाट क्षमता जुड़ पाई है। अक्षय ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने के बावजूद भारत ने पिछले चार वर्षो में कोयले का रिकॉर्ड उत्पादन किया। ये आंकड़े एक महत्वपूर्ण रुझान को दर्शाते हैं जिसे समझना आवश्यक है। लोकप्रिय मांग के चलते कोयले को खारिज करने से पहले भारत की ऊर्जा जरूरतों को समझना बेहद जरूरी है। साल 2010-2017 के बीच बिजली उत्पादन सात प्रतिशत बढ़ा जिसका सकल घरेलू उत्पाद पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। हालांकि 344 गीगावाट की स्थापित क्षमता से 1,200 अरब यूनिट बिजली उत्पादन हुआ जबकि भारत की प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले सबसे कम है। वर्ष 2017 में 1.33 अरब की आबादी वाले भारत में ... Read More »

तीन हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस की हुई शानदार वापसी, राहुल गांधी का बढ़ता राजनीतिक कद

विधानसभा चुनाव वाले पांच में से तीन राज्यों-छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में लोगों की दिलचस्पी अधिक थी तो इसीलिए कि इन तीनों में भाजपा सत्ता में थी और उसका मुकाबला दूसरे राष्ट्रीय दल कांग्रेस से था। कांग्रेस ने जहां छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा से सत्ता छीन ली वहीं मध्य प्रदेश में भी सत्ता हासिल करने के करीब पहुंच गई। हालांकि वह मिजोरम में सत्ता से बाहर हो गई और तेलंगाना में तेलुगु देसम से गठबंधन के बावजूद तेलंगाना राष्ट्र समिति को सत्ता में वापसी करने से नहीं रोक सकी, फिर भी छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में उसके प्रदर्शन ने उसका मनोबल और साथ ही राजनीतिक कद बढ़ाने का काम किया है। इन तीनों राज्यों में कांग्रेस की सफलता पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व पर तो मुहर लगाने वाली है ही, राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस की वापसी का साफ संकेत देने वाली भी है। यह वापसी जितना कांग्रेस के लिए बेहतर है उतना ही राष्ट्रीय राजनीति और साथ ही हमारे संसदीय लोकतंत्र के लिए भी। तीन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी की राजनीतिक अहमियत ... Read More »

बिना अल्‍कोहल छोड़े ही हैंगओवर से निपटे ऐसे, पीने वालों के लिए उपयोगी खबर

 शराब पीने वालों के लिए हैंगओवर एक गंभीर समस्‍या है। यह स्थिति तब उत्‍पन्‍न होती है, जब आप अधिक मात्रा में शराब का सेवन करते हैं। एक शोध में यह बात सामने आई है कि आप कुछ नुस्‍खों को अपनाकर हैंगओवर से होने वाले खतरों से निपट सकते हैं। जी हां, शोधपरक इस खबर को पढ़ने के बाद आप इस प्रकार की समस्‍याओं से निजात पा लेंगे। आप इस बात से चिंतित हो रहे होंगे कि हैंगओवर से निपटने के लिए शराब पीने में मनाही होगी। लेकिन ऐसा नहीं है शोधकर्ताओं का सारा उपक्रम इस बात पर है कि आप हैंगओवर की स्थिति में क्‍या करें, जिससे हैंगओवर से निकल सकें। यही इस शोध की खूबी है। दरअसल, रात में अधिक मात्रा में शराब का सेवन आपको हैंगओवर में डाल सकता है। यदि आपको सुबह मिचली या चक्‍कर आता है तो यह हैंगओवर की निशानी है। सुबह उठने पर आपकी मांसपेशियों में दर्द होना भी इसका लक्ष्‍ण है। शोधकर्ताअों का कहना है कि इससे आपकी पूरी दिनचर्या प्रभावित होती है। एक सर्वे के अनुसार हैंगओवर से किसी व्‍यक्ति का एक वर्ष ... Read More »

पंख मजबूत नहीं, तो सपनों की उड़ान असंभव

बहुत ऊंचे ख्वाब हों, तो वहां तक पहुंचने के लिए मजबूत पंख चाहिए। हमने स्मार्ट सिटी का सपना देखा, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति नहीं दिखाई। हमारा समाज ‘स्मार्ट’ तब होगा, जब हमारे पास स्वस्थ हवा, स्वस्थ पर्यावरण और स्वस्थ बचपन होगा।पिछले कुछ दशकों से जिस तरह  देश में औद्योगिकीकरण बढ़ा, उससे गांवों से शहरों की तरफ लोगों का पलायन भी तेजी से बढ़ा है। इससे एक तरफ जहां शहर आबादी के बोझ से कराह उठे हैं, वहीं गांव का जीवन भी नीरस हो गया है। इन सबके पीछे गांवों में बढ़ती बेरोजगारी और जन सुविधाओं का अभाव है। वहीं शहर भी अधकचरे विकास की वजह से बेदम होते जा रहे हैं। जून से शुरू हुआ मानसून सीजन शहरों के लिए बवाल बन गया है। जल निकासी का उचित प्रबंध नहीं होने की वजह से कई शहरों के निचले इलाके बारिश के पानी से डूबने लगे हैं। जल निकासी प्रबंधन की कमी के कारण आलम यह हो गया है कि थोड़ी-सी बारिश के बाद सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। इसे नागरिक संस्थाओं की विफलता कहें या विकास की अधूरी परिकल्पना। जो शहर कभी ... Read More »

हर साल क्यों मनाया जाता है,अर्मेड फोर्सेज फ्लैग डे …

चुनाव तो होते रहते हैं. सरकारें बनती और गिरती रहती हैं। लेकिन इस बीच एक चीज़ कभी नहीं बदलती, और वो है हमारे देश के सैनिकों का शौर्य और बलिदान. आपमें से कई लोग ऐसे होंगे, जो आज अपना जन्मदिन मना रहे होंगे. किसी के परिवार में कोई खुशखबरी आई होगी. कोई अपने Promotion की खुशी में Party कर रहा होगा. कोई अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ जश्न मना रहा होगा. हम ये नहीं कह रहे, कि इसमें कोई बुरी बात है. क्योंकि, हर छोटी से छोटी खुशी को Celebrate करना ही जीवन जीने का असली तरीका है. लेकिन, क्या आज आपने अपनी निजी खुशियों के बीच भारत की सेना को याद किया ? अगर नहीं किया, तो अब भी देर नहीं हुई है.. आप उन्हें अब भी Salute कर सकते हैं, क्योंकि, आज Armed Forces Flag Day है…और आप इस दिन को भारत की सेना का दिन भी कह सकते हैं. भारत की आज़ादी के बाद ये फैसला लिया गया था…कि अगर Armed Forces के जवानों को कोई नुकसान हो जाता है, तो उनके कल्याण, उनकी ... Read More »

शहरीकरण की समस्याओं का समाधान तभी निकलेगा जब आम नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे

सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश केएस राधाकृष्णनन की अध्यक्षता में गठित कमेटी की ओर से पेश यह आंकड़ा चौंकाने और साथ ही चिंतित करने वाला है कि पांच सालों में सड़क पर गड्ढों के कारण करीब 15 हजार लोगों की मौत हुई है। 2012 से लेकर 2017 तक के इस भयावह आंकड़े को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह सही कहा कि ये मौतें तो आतंकी हमलों में होने वाली मौतों से भी अधिक हैैं। उसके इस निष्कर्ष से भी असहमत नहीं हुआ जा सकता कि सड़क के गड्ढों के कारण होने वाली इतनी अधिक मौतों से यही पता चलता है कि प्रशासन सड़कों का रखरखाव उचित तरीके से नहीं कर रहा है। स्पष्ट है कि इस प्रशासन में नगर निकायों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तक आते हैैं। कहना कठिन है कि सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद सड़कों पर गड्ढों के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए राज्य एवं केंद्र सरकार क्या जतन करती हैैं और उससे हालात कितने बदलते हैैं, क्योंकि समस्या केवल यही नहीं है कि सड़कों पर गड्ढे जानलेवा ... Read More »

कश्मीर में क्या काम: नार्वे के पूर्व पीएम बोंदेविक के कश्मीरी दौरे को लेकर कई सवाल खड़े हुए

 नार्वे के पूर्व प्रधानमंत्री शेल माग्ने बोंदेविक ने पिछले दिनों श्रीनगर का दौरा किया। वहां उन्होंने अलगाववादी हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और यासिन मलिक से मुलाकात की। वह कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और कश्मीर चैंबर ऑफ बिजनेस एंड इंडस्ट्री के सदस्यों से भी मिले। श्रीनगर दौरे के बाद बोंदेविक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) भी गए। वहां पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और पीओके के तथाकथित राष्ट्रपति मसूद खान के साथ भी उनकी बैठक हुई। उन्होंने नियंत्रण रेखा यानी एलओसी का दौरा भी किया। बोंदेविक के इस दौरे से कई सवाल खड़े हुए हैं। तमाम विश्लेषक भी उनका जवाब ढूंढने में जूझ रहे हैं जिनमें मैं भी अपवाद नहीं हूं। बीते कई वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी विदेशी राजनीतिक व्यक्ति को कश्मीर में अलगाववादी नेताओं से मिलने दिया गया हो। हालांकि बोंदेविक अभी किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं, लेकिन आखिर वह कश्मीर में दिलचस्पी क्यों ले रहे हैैं? चिंता की एक और वजह नार्वे के नेताओं का वह रवैया भी है जिसमें वह देशों के आंतरिक मामलों को ... Read More »

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साकार होता देश का हर घर रोशन करने का सपना

जिस देश में योजनाएं अपनी लेटलतीफी के कारण कुख्यात रही हों और जहां तमाम कारणों से सरकारी कामकाज में देरी का रिकॉर्ड रहा हो वहां निर्धारित समय से पहले यदि कोई योजना पूरी हो जाए तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं कहा जाएगा। 15 अगस्त, 2015 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक हजार दिनों के भीतर देश के सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। राजनीतिक इच्छाशक्ति और नौकरशाही की चुस्ती के कारण यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य 988 दिन में ही पूरा हो गया यानी तय समय से 12 दिन पहले, लेकिन इस उपलब्धि में एक खामी यह छिपी है कि विद्युतीकृत गांवों में एक बड़ी संख्या ऐसे घरों की रही जो अभी भी अंधेरे में डूबे हैं। ऐसे घरों की तादाद लाख दो लाख न होकर साढ़े चार करोड़ है। इसे देखते हुए देश के हर घर को रोशन करने का भारी-भरकम लक्ष्य हर गांव तक बिजली पहुंचाने के लक्ष्य से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर, 2017 को प्रधानमंत्री ... Read More »

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