Tuesday , 23 April 2019
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बच्चों ने पीठ पर बैठ‍ाकर बुजुर्गों से डलवाए वोट, 3 KM चलना पड़ा पैदल

लोकसभा चुनाव 2019 का पहला चरण समाप्त हो गया है. चुनाव में ऐसे भी रंग देखने को म‍िले जो एक नई अनुभूत‍ि लाते हुए प्रतीत हो रहे हैं. बुजुर्गों को वोट डालने में कोई परेशानी न आए, इसके ल‍िए कुछ बच्चों ने अनोखा कदम उठाया. वे बुजुर्गों को अपनी पीठ पर उठाकर मतदान करवाने ले गए. द‍िल को छूने वाला ये नजारा उत्तराखंड के ट‍ि‍हरी गढ़वाल ज‍िले के एक गांव में देखने को म‍िला. उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल ज‍िले में घन्साली तहसील है. उसी में एक छोटा सा गांव है बजिन्गा. यहां कुछ बच्चों ने अनोखी पहल की. बच्चों ने बुजुर्गों को कंधे पर उठाया और पोल‍िंग बूथ तक लेकर गए. इस गांव के ऐसे कम से कम 7 बुजुर्गों को इस तरह बूथ तक पहुंचाया गया. बुजुर्गों को पीठ पर बैठाकर पोल‍िंग बूथ पहुंचाया इस सराहनीय पहल से जुड़े दीपक मैठाणी ने बताया, ‘हम चाहते थे क‍ि हमारे गांव का हर व्यक्त‍ि वोट डाले. इसके ल‍िए हमने गांव के सभी लोगों को जागरूक भी क‍िया. इसी दौरान कुछ बुजुर्गों ने वोट देने की इच्छा जताई लेक‍िन वे बूथ तक ... Read More »

स्‍वामी विवेकानंद की जयंती पर पढ़ें उनके वे 8 विचार, जो जीवन को बना देंगे सफल

आज स्वामी विवेकानंद की 156वीं जयंती है. उनका जन्‍म 1863 में आज ही के दिन कोलकाता में हुआ था. उनके विचार आज भी प्रासांगिक बने हुए हैं. स्वामी जी के विचार किसी भी व्यक्ति की निराशा को दूर कर सकते हैं. उसमें आशा भर सकते हैं. प्रस्तुत हैं स्वामी जी के कुछ ऐसे ही विचार… 1. उठो और जागो और तब तक रुको नहीं जब तक कि तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते. 2. आप जो भी सोचेंगे. आप वही हो जाएंगे. अगर आप खुद को कमजोर सोचेंगे तो आप कमजोर बन जाएंगे. अगर आप सोचेंगे की आप शक्तिशाली हैं तो आप शाक्तिशाली बन जाएंगे.  3. एक विचार चुनिए और उस विचार को अपना जीवन बना लिजिए. उस विचार के बारे में सोचें उस विचार के सपने देखें. अपने दिमाग, अपने शरीर के हर अंग को उस विचार से भर लें बाकी सारे विचार छोड़ दें. यही सफलता का रास्ता हैं. 4. एक नायक की तरह जिएं. हमेशा कहें मुझे कोई डर नहीं, सबको यही कहें कोई डर नहीं रखो. 6. अगर आप पौराणिक देवताओं में यकीन करते हैं और खुद ... Read More »

हालिया घटनाओं से अगर हमने अब भी सबक नहीं लिया तो भयावह हो सकते हैं नतीजे

इसमें तो संदेह नहीं है कि सैकड़ों साल पहले आग का इंसान के हाथ लगना उसकी जिंदगी को क्रांतिकारी ढंग से बदलने वाला करिश्मा था। उस वक्त जंगलों में रहने वाला इंसान आग पर नियंत्रण के साथ ऐसी ताकत पा गया, जिससे वह न सिर्फ अन्य जंगली जीवों से अपनी रक्षा कर सकता था, बल्कि उन पर प्रभुत्व बनाते हुए भूख से लड़कर जीने का एक नया आधार पा सकता था, लेकिन कथित विकास के नाम पर असली जंगलों से शहरों के कंक्रीट के जंगलों में पहुंची मानव सभ्यता के लिए आज वही आग उसकी ताकत के उलट कमजोरी साबित हो रही है। मुंबई के मरोल (अंधेरी पूर्व) इलाके में ईएसआइसी कामगार अस्पताल में बीते दिनों लगी आग और इस हादसे में हुई सात मौतों ने साबित किया है कि चंद लापरवाहियों के चलते हम आग के आगे आज कितने लाचार बन गए हैं। आग से सुरक्षा के जितने उपाय जरूरी हैं, तेज शहरीकरण की आंधी और अनियोजित विकास ने उन उपायों को हाशिये पर धकेल दिया है। विडंबना यह है कि जो कथित विकास हमारे देश में हो रहा ... Read More »

पैसा खर्च करने के बाद भी उभोक्ताओं को नहीं मिल रहा है बेहतर नेटवर्क

अब हम देश के 65 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं के साथ हो रहे धोखे का विश्लेषण करेंगे . हमारे देश की टेलिकॉम कंपनियां बेहतर नेटवर्क के नाम पर करोड़ों ग्राहकों को ठग रही हैं . सवा पांच लाख करोड़ रुपये के साथ भारत, दुनिया का सबसे तेज़ी से बढ़ता हुआ टेलिकॉम बाज़ार है . यानी देश की टेलिकॉम कंपनियां मुनाफे के ऊंचे ऊंचे टावर पर बैठी हैं लेकिन ग्राहकों को देने के लिए इनके पास बेहतर नेटवर्क नहीं है . आपने अक्सर मोबाइल फोन पर बात करते हुए अचानक फोन कट जाने या फोन न मिलने वाली समस्या का सामना किया होगा . टेलिकॉम की भाषा में इसे Call Drop और Call Connect वाली समस्या कहते है .  एक सर्वे के मुताबिक देश के करीब 90% मोबाइल उपभोक्ता Call Drop और Call Connect वाली समस्या से परेशान हैं .  देश के 72% लोगों का मानना है कि कमज़ोर मोबाइल नेटवर्क की वजह से Call Drop की समस्या आती है . यानी उनके फोन बीच में ही कट जाते हैं.  Call Drop की समस्या से परेशान होकर करीब 30 प्रतिशत लोग इंटरनेट ... Read More »

आतंकियों से लोहा ले रहे सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी करना आतंकवाद को खुला समर्थन है

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान तीन आतंकियों के साथ जो अन्य लोग मारे गए उन्हें आम नागरिक के रूप में परिभाषित करना मुश्किल है। ये तो वे पत्थरबाज थे जो आतंकियों को बचाने के लिए सुरक्षा बलों पर पथराव करने के साथ ही उनके सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। केवल इतना ही नहीं, वे आतंकियों से लोहा ले रहे जवानों के हथियार छीनने का भी दुस्साहस कर रहे थे। यह सही है कि सुरक्षा बलों से विषम परिस्थितियों में भी संयम बरतने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन आखिर संयम की भी एक सीमा होती है। यह किसी से छिपा नहीं कि पत्थरबाज कई बार घायल जवानों को अस्पताल ले जाने का रास्ता तक नहीं देते। गत दिवस ही यदि आतंकियों को मार गिराने की कोशिश में घायल जवान समय पर अस्पताल पहुंच जाता तो शायद उसकी जान बच जाती। सुरक्षा बलों को संयम की सीख देने वालों को इससे परिचित होना चाहिए कि पुलवामा में पत्थरबाजों पर गोली इसलिए चलानी पड़ी, क्योंकि लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल के ... Read More »

बोन मैरो कैंसर अब नहीं रहेगा लाइलाज, दिखी उम्मीद की नई किरण

 गंभीर बोन मैरो कैंसर के इलाज की दिशा में उम्मीद की नई किरण दिखी है। ब्रिटेन की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने क्लीनिकल ट्रायल में एक दवा को मायलोमा के मरीजों पर प्रभावी पाया है। इस कैंसर से जूझ रहे मरीजों को लेनालिडोमाइड दवा दी गई। लैंसेट ओंकोलॉजी जर्नल में प्रकाशित नतीजों के मुताबिक, जिन मरीजों को यह दवा दी गई, उनमें अन्य के मुकाबले ज्यादा सुधार देखा गया। मायलोमा प्लाज्मा कोशिकाओं का कैंसर है जो रीढ़, सिर, पेल्विस और पसलियों में होता है। यह गंभीर किस्म का कैंसर है। इसके इलाज में प्राय: कीमोथेरेपी और स्टेम-सेल प्रत्यारोपण की पद्धति अपनाई जाती है। प्रोफेसर ग्राहम जैकसन ने कहा, ‘हमारे शोध से यह सामने आया है कि ऐसे मरीज जिनमें हाल ही में इस कैंसर की पहचान हुई हो, उन्हें स्टेम- सेल प्रत्यारोपण से पहले यह दवा देनी चाहिए।’ यह दवा इलाज की प्रक्रिया के दौरान मरीजों की सेहत को बेहतर रखने में मददगार है। बोन मैरो यानि अस्थि मज्जा मुख्य हड्डियों के बीच में एक मुलायम व स्पॉंजी टिशू है। इसमें रक्त बनाने वाली अपरिपक्व कोशिकाएं होती हैं जिन्हें स्टेम सेल्स ... Read More »

आतंकियों से लोहा ले रहे सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी करना आतंकवाद को खुला समर्थन है

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान तीन आतंकियों के साथ जो अन्य लोग मारे गए उन्हें आम नागरिक के रूप में परिभाषित करना मुश्किल है। ये तो वे पत्थरबाज थे जो आतंकियों को बचाने के लिए सुरक्षा बलों पर पथराव करने के साथ ही उनके सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। केवल इतना ही नहीं, वे आतंकियों से लोहा ले रहे जवानों के हथियार छीनने का भी दुस्साहस कर रहे थे। यह सही है कि सुरक्षा बलों से विषम परिस्थितियों में भी संयम बरतने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन आखिर संयम की भी एक सीमा होती है। यह किसी से छिपा नहीं कि पत्थरबाज कई बार घायल जवानों को अस्पताल ले जाने का रास्ता तक नहीं देते। गत दिवस ही यदि आतंकियों को मार गिराने की कोशिश में घायल जवान समय पर अस्पताल पहुंच जाता तो शायद उसकी जान बच जाती। सुरक्षा बलों को संयम की सीख देने वालों को इससे परिचित होना चाहिए कि पुलवामा में पत्थरबाजों पर गोली इसलिए चलानी पड़ी, क्योंकि लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल के ... Read More »

सोच के मुताबिक बनता है कर्म

दो मित्र अक्सर एक वेश्या के पास जाया करते थे। एक शाम जब वे वहां जा रहे थे, रास्ते में किसी संत का आध्यात्मिक प्रवचन चल रहा था। एक मित्र ने कहा कि वह प्रवचन सुनना पसंद करेगा। उसने उस रोज वेश्या के यहां नहीं जाने का फैसला किया। दूसरा व्यक्ति मित्र को वहीं छोड़ वेश्या के यहां चला गया। अब जो व्यक्ति प्रवचन में बैठा था, वह अपने मित्र के विचारों में डूबा हुआ था। सोच रहा था कि वह क्या आनंद ले रहा होगा और कहां मैं इस खुश्क जगह में आ बैठा। मेरा मित्र ज्यादा बुद्धिमान है, क्योंकि उसने प्रवचन सुनने की बजाए वेश्या के यहां जाने का फैसला किया। उधर, जो आदमी वेश्या के पास बैठा था, वह सोच रहा था कि उसके मित्र ने इसकी जगह प्रवचन में बैठने का फैसला करके मुक्ति का मार्ग चुना है, जबकि मैं अपनी लालसा में खुद ही आ फंसा। प्रवचन में बैठे व्यक्ति ने वेश्या के बारे में सोचकर बुरे कर्म बटोरे। अब वही इसका दुख भोगेगा। गलत काम की कीमत आप इसलिए नहीं चुकाते, क्योंकि आप वेश्या ... Read More »

आखिरकार टूट गया भाजपा का तिलिस्‍म, मजबूत प्रतिद्वंदी बनकर फिर सामने आई कांग्रेस

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव नतीजों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के इर्द-गिर्द बना अपराजेयता का तिलिस्म टूट गया। यहां तक कि राहुल गांधी ने हिंदी पट्टी के इन तीन प्रमुख राज्यों में अपनी पार्टी को बहुमत या उसके करीब पहुंचाते हुए खुद को एक गंभीर प्रतिद्वंद्वी के रूप में साबित कर दिया है। राहुल गांधी की अगुआई में पहली बार पार्टी को चुनावी जीत मिली है। राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के एक साल बाद उनकी पार्टी को पूवरेत्तर (मिजोरम) और दक्षिण (तेलंगाना) में भले ही पराजय ङोलनी पड़ी हो, लेकिन हिंदी पट्टी के तीन बड़े राज्यों में मिली इस सफलता ने उसे वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले संजीवनी प्रदान कर दी है। हालांकि उसकी आगे की राह अभी आसान नहीं रहने वाली है। इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि कुछ हिस्सों में राहुल की रणनीति के सकारात्मक नतीजे नहीं मिले। जैसे तेलंगाना में तेलुगु देशम पार्टी के साथ गठबंधन का फॉमरूला कारगर नहीं रहा। ना ही उनकी पार्टी मिजोरम में एंटी-इनकम्बैंसी को थाम ... Read More »

वक्त की मांग को पूरा करने के लिए जरूरी है कोयले से बनने वाली तापीय बिजली

देश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए जरूरी है कि अगले कुछ वर्षों में तापीय और साथ ही अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता में विस्तार हो। अक्टूबर 2018 में व्यस्त समय यानी पीक ऑवर में बिजली की मांग 180 गीगावाट तक पहुंच गई थी। यह अब तक की सबसे ऊंची मांग है। इसके उलट चालू वित्त वर्ष में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में केवल तीन गीगावाट क्षमता जुड़ पाई है। अक्षय ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने के बावजूद भारत ने पिछले चार वर्षो में कोयले का रिकॉर्ड उत्पादन किया। ये आंकड़े एक महत्वपूर्ण रुझान को दर्शाते हैं जिसे समझना आवश्यक है। लोकप्रिय मांग के चलते कोयले को खारिज करने से पहले भारत की ऊर्जा जरूरतों को समझना बेहद जरूरी है। साल 2010-2017 के बीच बिजली उत्पादन सात प्रतिशत बढ़ा जिसका सकल घरेलू उत्पाद पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। हालांकि 344 गीगावाट की स्थापित क्षमता से 1,200 अरब यूनिट बिजली उत्पादन हुआ जबकि भारत की प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले सबसे कम है। वर्ष 2017 में 1.33 अरब की आबादी वाले भारत में ... Read More »

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